अल्ट्रासाउंड स्कैन / सोनोग्राफी क्या है? सोनोग्राफी के बारे में पूरी जानकारी

गर्भवती महिलाओं में बच्चे की सेहत और लाल के स्थिति को जानने के लिए भी इस टेस्ट का उपयोग किया जाता है


सोनोग्राफी यह अल्ट्रासाउंड non इमेजिंग तकनीक है, जिससे हाई फ्रिकवेंसी ध्वनि तरंगों की मदद से शरीर के आंतरिक भागों को देखा जाता है. आमतौर पर सोनोग्राफी शरीर के आंतरिक अंग देखने के लिए उपयोग किया जाता है. इसके अलावा शरीर में जमे पानी को ट्रेन करने के के लिए भी अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी की जरूरत पड़ती है. यदि रोगी को एफएनएसी अथवा नीडल बायोप्सी के सैंपल की आवश्यकता हो तब भी कभी-कभी अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है.

सोनोग्राफी टेस्ट कैसे किया जाता है

शरीर के किस अंग की जांच करनी हो उस पर Gel लगाया जाता है. उसके बाद अंग को देखने के लिए हाथ में पकड़े हुए प्रोब की मदद से इसे रगड़ा जाता है. आमतौर पर इस टेस्ट के दौरान किसी किस्म का दर्द का अनुभव नहीं होता है. लेकिन Gel लगाने से ठंडा ठंडा महसूस हो सकता है. यदि रोगी का एफएनएसी अथवा बायोप्सी का सैंपल लेते समय दर्द हो सकता है. इस टेस्ट करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है यह टेस्ट कम से कम

टेस्ट से हमें क्या जानकारी मिलती है

  • रोड का आकार लोड का आकार
  • पे लिवर पेनक्रियाज किला से और ओपन इसकी जानकारी से ले सकते हैं
  • किडनी और मुद्रा से की जानकारी इस टेस्ट से किडनी में पत्थर का पता लगाया जाता है
  • पहली विकास गर्भाशय और ओवरी की जानकारी लेते हैं
  • गर्भवती महिलाओं में बच्चे की सेहत और लाल के स्थिति को जानने के लिए भी इस टेस्ट का उपयोग किया जाता है

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